NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga Chapter 01 दो बैलों की कथा

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Class 9 Hindi Ganga Chapter 01 दो बैलों की कथा NCERT Solutions PDF

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

 

Question 1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?
(a) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता
(b) एकता और सहयोग
(c) गर्व and दंभ
(d) विद्रोह और क्रोध
Answer: (b) एकता और सहयोग
In simple words: हीरा और मोती की दोस्ती आपसी मेलजोल और मिल-जुलकर काम करने की सीख देती है। वे मुसीबत में कभी एक-दूसरे को अकेला नहीं छोड़ते और मिलकर हर संकट का सामना करते हैं।

Exam Tip: इस उत्तर में सांड से मुकाबला और काँजीहौस की घटना का प्रसंग देकर एकता के गुण को सिद्ध करें।

 

Question 2. हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?
(a) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।
(b) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।
(c) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
(d) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।
Answer: (c) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
In simple words: बैलों को लगा कि झूरी ने उन्हें पराया समझकर बेच दिया है, जिससे उनका मान-सम्मान आहत हुआ। इसी भावनात्मक ठेस के कारण वे नए घर में नहीं रहना चाहते थे।

Exam Tip: उत्तर में इस बात पर बल दें कि बैलों का विरोध भौतिक असुविधाओं के कारण नहीं, बल्कि भावनात्मक उपेक्षा के कारण था।

 

Question 3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?
(a) कष्टों से बचने के लिए
(b) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए
(c) अभिमान की रक्षा के लिए
(d) अपनापन पाने के लिए
Answer: (d) अपनापन पाने के लिए
In simple words: बैलों के लिए गया के घर का रूखा व्यवहार असहनीय था। वे अपने पुराने स्वामी झूरी के घर मिलने वाले दुलार, सम्मान और सुरक्षा को वापस पाना चाहते थे।

Exam Tip: 'अपनापन पाने की भावना' को सिद्ध करने के लिए झूरी के दुलार और गया की क्रूरता की तुलनात्मक चर्चा करें।

 

Question 4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?
(a) स्वाभिमान
(b) अहिंसा
(c) पराधीनता
(d) अन्याय की रक्षा
Answer: (a) स्वाभिमान
In simple words: बिना बात के पीटे जाने पर मोती का गुस्सा होना उसके स्वाभिमान को दिखाता है। वह किसी भी अन्याय या अत्याचार को बिना विरोध किए सहने के पक्ष में नहीं था।

Exam Tip: मोती के आक्रोश को 'स्वाभिमान' और 'अन्याय के मुखर विरोध' के रूप में परिभाषित करें।

 

Question 5. कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?
(a) कहानी को रोचक बनाने के लिए
(b) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए
(c) संवादों को छोटा रखने के लिए
(d) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए
Answer: (b) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए
In simple words: बिना कुछ कहे एक-दूसरे की बात समझ लेने की कला यह दर्शाती है कि पशुओं के भीतर भी इंसानों की तरह गहरी भावनाएं, समझ और सोचने की शक्ति होती है।

Exam Tip: मूक-भाषा को मूक पशुओं में मानवीय गुणों (स्नेह, सहानुभूति, बुद्धि) के संचार के रूप में समझाएं।

 

Question 6. “दो बैलों की कथा” को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?
(a) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के
(b) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के
(c) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के
(d) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
Answer: (d) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
In simple words: हीरा और मोती का बार-बार रस्सियाँ तोड़ करना और आज़ादी के लिए लड़ना, ब्रिटिश हुकूमत से आज़ाद होने के लिए छटपटाती हुई भारतीय जनता के संघर्ष को दर्शाता है।

Exam Tip: प्रेमचंद के इस रूपक को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के मुख्य स्तंभों (दृढ़ संकल्प, आत्मसम्मान और सतत संघर्ष) से जोड़ते हुए लिखें।

 

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मेरी समझ मेरे विचार

 

Question 1. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
Answer: नए परिवेश में पहुँचकर बैलों द्वारा काम न करने का मुख्य कारण झूरी के प्रति उनकी अनन्य निष्ठा थी। झूरी के घर उन्हें जो दुलार और आदर प्राप्त था, वह गया के संवेदनहीन वातावरण में पूरी तरह लुप्त था। सूखा भूसा खाने को दिया जाना और अकारण डंडे बरसाया जाना उनके लिए अत्यंत अपमानजनक था। उन्हें यह आभास हो गया था कि उन्हें बलपूर्वक एक ऐसे निर्दयी स्थान पर भेज दिया गया है जहाँ अपनत्व नाम की कोई चीज नहीं है। इसी स्वाभिमान और गृह - प्रेम की रक्षा के लिए उन्होंने मूक विद्रोह का मार्ग चुना।
In simple words: बैल अपने पुराने मालिक झूरी से बहुत प्यार करते थे। गया के घर में मिले अपमान, रूखे व्यवहार और डंडों के कारण उनका स्वाभिमान आहत हुआ और उन्होंने विरोध स्वरूप काम करने से मना कर दिया।

Exam Tip: उत्तर में 'स्वाभिमान की रक्षा' और 'पुराने मालिक के प्रति भावनात्मक निष्ठा' को काम न करने के प्रमुख कारणों के रूप में प्रस्तुत करें।

 

Question 2. “गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है कैसे? (संकेत - वे क्यों लौट आए, उनके और झूरी के मन में कौन-कौन से भाव रहे होंगे, क्या वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है आदि।)
Answer: मूक पशुओं का गया की कैद से भागकर पुनः झूरी के द्वार पर आ खड़ा होना उनकी अगाध स्वामिभक्ति को प्रदर्शित करता है। यह घटना असाधारण है क्योंकि यह पशुओं की आंतरिक स्मृति और तीव्र संवेदनशीलता का प्रमाण है। अत्याचार से मुक्ति पाकर अपनी सुरक्षा और दुलार के मूल स्रोत (झूरी) तक पहुँचने की उनकी छटपटाहट इसमें मुखर हुई है। झूरी के हृदय में भी अपने मूक परिजनों को वापस पाकर वात्सल्य का ज्वार उमड़ पड़ा, जो मानव और पशु के अटूट अंतर्संबंधों को प्रकट करता है। वास्तविक संसार में भी पशुओं का ऐसा गहरा प्रेम सर्वविदित है।
In simple words: बैलों का वापस लौटना उनके और झूरी के बीच के गहरे प्यार और वफादारी को दिखाता है। गया के जुल्मों से तंग आकर वे अपने पुराने स्नेहिल घर की याद में लौट आए, जिससे यह घटना अत्यंत भावुक बन गई।

Exam Tip: इस उत्तर में मानव - पशु के भावनात्मक अंतर्संबंधों और पशुओं की गृह - स्मृति (मेमोरी) को मुख्य तार्किक आधार बनाएं।

 

Question 3. “मोती ने मूक-भाषा में कहा - अब तो नहीं saha जाता, हीरा!” “कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है” इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
Answer: कथा के कई निर्णायक मोड़ इस बात की पुष्टि करते हैं कि आत्मरक्षा और मर्यादा हेतु प्रतिरोध अनिवार्य हो जाता है। गया के अमानवीय व्यवहार के विरुद्ध मोती की मूक व्याकुलता यह प्रतिपादित करती है कि निरंतर शोषण को मूकदर्शक बनकर स्वीकार करना कायरता है। इसी प्रकार, जब एक विशाल और आक्रामक साँड़ उन पर झपटता है, तो दोनों बैल संगठित होकर उस पर प्राणघातक हमला करते हैं। काँजीहौस की चहारदीवारी को ध्वस्त कर अन्य निरीह बंदियों को जीवनदान देना भी उनके संघर्ष का ज्वलंत उदाहरण है। इन सब प्रसंगों से स्पष्ट है कि न्याय और स्वाधीनता के लिए संघर्ष अपरिहार्य है।
In simple words: कहानी के अनुसार अत्याचार को चुपचाप सहना गलत है। गया के जुल्मों के खिलाफ खड़ा होना, साँड़ को मिलकर हराना और काँजीहौस की दीवार तोड़ना यह दिखाता है कि स्वाभिमान और आज़ादी के लिए लड़ना ज़रूरी है।

Exam Tip: उत्तर में बैलों द्वारा किए गए तीन विशिष्ट संघर्षों (साँड़ का मुकाबला, गया का विरोध और काँजीहौस की दीवार तोड़ना) का क्रमबद्ध उल्लेख करें।

 

Question 4. “जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया….” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
Answer: यद्यपि दोनों बैलों के लिए परतंत्रता की बेड़ियाँ असहनीय थीं, फिर भी उनके अंतर्मन में 'अपनापन' पाने की ललक 'स्वतंत्रता' की चाह से कहीं अधिक बलवती थी। गया के चंगुल से मुक्त होने और सांड को परास्त करने के बाद भी वे उन्मुक्त होकर वनों में नहीं भटके, बल्कि बार-बार झूरी की देहरी पर ही लौटे। यदि वे केवल आज़ाद घूमना चाहते तो काँजीहौस या मटर के खेत के बाद कहीं भी भाग सकते थे, परंतु झूरी के घर मिलने वाला वात्सल्य, मान और पारिवारिक स्नेह उनके जीवन का परम ध्येय था। अतः उनका संपूर्ण संघर्ष अपनापन और भावनात्मक संबल प्राप्त करने के लिए ही था।
In simple words: बैलों के लिए आज़ादी से भी बढ़कर झूरी का अपनापन और प्यार था। वे आज़ाद होने के बाद भी जंगलों में भटकने के बजाय बार-बार झूरी के घर लौट आते थे, क्योंकि उन्हें वहीं सच्चा स्नेह मिलता था।

Exam Tip: इस उत्तर में बैलों की 'घर वापसी की सतत चेष्टा' को मुख्य आधार बनाकर 'अपनापन' की भावना को अधिक प्रबल सिद्ध करें।

 

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मेरी कल्पना में अनुमान

 

Question 1. “उसने उनके माथे सहलाए और बोली - खोल देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…” यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?
Answer: उस बालिका के स्थान पर होने पर मेरा सर्वप्रथम प्रयास बैलों के शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाए रखना होता, जिसके लिए मैं उन्हें पर्याप्त चारा और पानी की व्यवस्था चोरी - छिपे करता। इसके बाद, रात्रिकाल के सन्नाटे का लाभ उठाकर, अत्यंत सावधानी से उनकी पगहिया (रस्सियाँ) खोल देता ताकि घर का कोई सदस्य जाग न सके। उन्हें केवल मुक्त करने के बजाय, मैं उन्हें गाँव के बाहर के मुख्य मार्ग तक सुरक्षित छोड़ आता, जहाँ से वे सीधे झूरी के घर का मार्ग पकड़ सकें। इस पूरी योजना को मैं इस तरह गुप्त रखता कि सौतेली माँ को मुझ पर लेशमात्र भी संदेह न हो।
In simple words: यदि मैं उस लड़की की जगह होता, तो मैं चुपके से बैलों के लिए अच्छे भोजन का प्रबंध करता और रात के सन्नाटे में उनकी रस्सियाँ खोलकर उन्हें गाँव के बाहर सुरक्षित रास्ते तक छोड़ आता ताकि वे बिना किसी खतरे के अपने पुराने घर पहुँच जाते।

Exam Tip: इस उत्तर में बैलों की 'सुरक्षा', 'भोजन की व्यवस्था' और 'रहस्य को गुप्त रखने' की रणनीतिक सूझबूझ को दर्शाएं।

 

Question 2. “दोनों गधे अभी तक क्यों-के-क्यों खड़े थे” भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।
Answer: यह मनोवैज्ञानिक रूप से सत्य है कि संशय और आशंका मनुष्य की निर्णय लेने की क्षमता को पंगु बना देती है, जिससे सामने आए सुनहरे अवसर भी हाथ से निकल जाते हैं। काँजीहौस में जब हीरा और मोती ने दीवार ध्वस्त कर दी, तो अन्य सभी जीव (घोड़े, बकरियाँ, भैंसें) तुरंत पलायन कर गए, परंतु दोनों गधे पकड़े जाने के भय और संकोच के कारण वहीं खड़े रहे। वास्तविक जीवन में भी हम देखते हैं कि अनेक मेधावी छात्र लोक - लाज या उपहास के डर से सभाओं में अपने उत्तम विचार प्रकट नहीं कर पाते। अतः प्रगति के लिए संकोच और भय की बेड़ियों को तोड़ना अत्यंत आवश्यक है।
In simple words: गधों का पिंजरा टूटने पर भी न भागना यह दिखाता है कि डर इंसान को आज़ादी का मौका मिलने पर भी आगे बढ़ने नहीं देता। वैसे ही असल जीवन में भी कई लोग संकोच के कारण आगे बढ़ने से हिचकिचाते हैं।

Exam Tip: गधों के व्यवहार को 'मानसिक दासता' और 'भय' के रूपक के रूप में समझाते हुए व्यावहारिक उदाहरणों से पुष्ट करें।

 

मेरी समझ मेरे विचार (पेज 18 के अन्य प्रश्न)

 

Question 1. “दोस्ती में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।
Answer: प्रेमचंद जी के इस विचार से आंशिक सहमति व्यक्त की जा सकती है। प्रगाढ़ मित्रता में औपचारिकताओं का अंत हो जाता है, जिससे मित्रों के बीच मधुर नोकझोंक, विनोदपूर्ण छींटाकशी और हल्का धौल - धप्पा होना स्वाभाविक है। यह उन्मुक्त व्यवहार एक - दूसरे के प्रति अगाध विश्वास और सुरक्षा की भावना को प्रदर्शित करता है। तथापि, यह आवश्यक नहीं कि प्रत्येक गहरी मित्रता में चंचलता ही हो। कई मित्र अत्यंत शांत, गंभीर और मर्यादित रहकर भी जीवन के संकटों में एक - दूजे की ढाल बनते हैं। सच्ची मित्रता की कसौटी बाह्य क्रियाकलाप नहीं, बल्कि आंतरिक विश्वास और मूक सहानुभूति है।
In simple words: गहरी दोस्ती में थोड़ा हँसी - मजाक और नोकझोंक होना स्वाभाविक है क्योंकि इससे आपसी खुलापन बढ़ता है। पर सच्ची दोस्ती की पहचान केवल खेल - कूद नहीं, बल्कि एक - दूसरे पर अटूट भरोसा और आदर होना है।

Exam Tip: उत्तर को संतुलित रखते हुए 'औपचारिकता का अंत' (धौल - धप्पा) और 'गंभीर विश्वास' - इन दोनों पक्षों की समीक्षा करें।

 

Question 2. “हीरा ने तिरस्कार किया - गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए”, “यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे” आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं - हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?
Answer: वैचारिक दृष्टि से हीरा का मर्यादित दृष्टिकोण अधिक श्रेष्ठ और अनुकरणीय है, अतः मैं हीरा के मत का पूर्ण समर्थन करता हूँ। युद्ध नीति और मानवीय मूल्य यह सिखाते हैं कि लाचार, निहत्थे अथवा पराजित शत्रु पर प्रहार करना कायरता का लक्षण है। विजय प्राप्त करने के बाद भी विजेता को करुणा और संयम का परित्याग नहीं करना चाहिए। मोती का हिंसक और आक्रामक रवैया तात्कालिक रोष में स्वाभाविक लग सकता है, परंतु वह दीर्घकालिक न्याय और मर्यादा की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। वास्तविक बल वही है जो विवेक और दया से नियंत्रित हो, जो हीरा के चरित्र की अनूठी खूबी है।
In simple words: मैं हीरा के विचारों से सहमत हूँ कि लाचार या हारे हुए दुश्मन पर वार करना गलत है। सच्ची बहादुरी वही है जो जीत के बाद भी दया, संयम और अच्छे आचरण को न छोड़े।

Exam Tip: हीरा के 'नीतिपरायण' (नैतिक) दृष्टिकोण की तुलना मोती के 'भावुक व हिंसक' दृष्टिकोण से करते हुए नैतिक पक्ष को श्रेष्ठ सिद्ध करें।

 

Question 3. “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?” क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।
Answer: सहयोग और निष्ठा की कसौटी विपत्ति काल ही होता है। माध्यमिक परीक्षा के दौरान मेरे सहपाठी और अभिन्न मित्र को गंभीर ज्वर हो गया, जिससे वह कई दिनों तक कक्षाओं में अनुपस्थित रहा और उसकी तैयारी अधूरी रह गई। इस संकट के समय मैंने स्वयं आगे बढ़कर प्रतिदिन शाम को उसके घर जाकर अपने नोट्स साझा किए और कठिन पाठों को सरल भाषा में समझाया। हमने रात - दिन मिलकर कड़ा परिश्रम किया। मेरी इस छोटी सी सहायता से उसका हौसला बढ़ा और वह न केवल परीक्षा में सम्मिलित हुआ, बल्कि उत्कृष्ट अंकों से उत्तीर्ण भी हुआ। इस प्रसंग ने मेरी इस धारणा को पुष्ट किया कि सच्ची मित्रता संकट की घड़ी में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने में ही सार्थक होती है।
In simple words: एक बार परीक्षा के दिनों में मेरे दोस्त की तबीयत बहुत खराब हो थी। मैंने रोज़ उसके घर जाकर उसे अपने नोट्स दिए और कठिन विषयों को समझाया, जिससे उसने अच्छे नंबरों से परीक्षा पास की। मुसीबत में साथ देना ही सच्ची दोस्ती है।

Exam Tip: अपने व्यक्तिगत अनुभव को आत्मीयता से लिखें और अंत में 'सच्ची मित्रता की परिभाषा' पर एक संक्षेप टिप्पणी जोड़ें।

 

Question 5. “बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी”, “अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है”- क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
Answer: यह पूर्णतः सत्य है कि बिना किसी विरोध के पीड़ा सहते जाना अत्याचारी के मनोबल को और सुदृढ़ करता है, जो परोक्ष रूप से अन्याय को बढ़ावा देना है। गया द्वारा बैलों को भूखा रखना और डंडों से पीटना तब तक जारी रहता जब तक हीरा और मोती ने काम करने से पूर्णतः मना नहीं कर दिया। उनका यह मूक प्रतिरोध स्पष्ट करता है कि स्वाभिमान की रक्षा के लिए दमन का सामना करना अनिवार्य है। चुपचाप सहने की प्रवृत्ति मनुष्य को दासता की ओर धकेलती है, अतः न्याय के लिए मुखर होना ही एकमात्र मार्ग है।
In simple words: बिना विरोध किए अत्याचार सहना अत्याचारी को और बढ़ावा देता है। बैलों ने गया के काम से इनकार करके यह दिखाया कि अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाना स्वाभिमान की रक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है।

Exam Tip: 'सहनशीलता की सीमा' और 'अन्याय के मुखर प्रतिरोध' के नैतिक सिद्धांतों को उत्तर के केंद्र में रखें।

 

Question 6. “बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अच्छे मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।
Answer: दोनों बैलों की अटूट मैत्री और सहअस्तित्व को प्रतिपादित करने वाले तीन प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. मूक सहानुभूति और सह - श्रम: दोनों कृषि कार्यों में कंधे से कंधा मिलाकर चलते थे और खिंचाव के समय एक - दूसरे का बोझ स्वयं उठाने की चेष्टा करते थे। वे एक - दूजे के मुख को चाटकर अपनी थकान मिटाते थे।
2. साँड़ के विरुद्ध सामूहिक रणनीति: जब खूँखार साँड़ ने उन पर हमला किया, तो अकेले लड़ने के बजाय दोनों ने मिलकर सुनियोजित ढंग से उसे घेरकर परास्त किया, जो उनकी अटूट एकता का प्रमाण है।
3. काँजीहौस में सह - त्याग: जब मोती दीवार गिराकर भाग सकता था, तब भी उसने बेड़ियों में जकड़े हीरा को अकेला छोड़ना स्वीकार नहीं किया और उसके साथ ही कैद रहना पसंद किया।
4. कठिन समय में साथ खड़े रहना: अनेक यात्राओं और संकटों (गया का घर, मटर का खेत, काँजीहौस और दढ़ियल कसाई) को झेलते हुए वे सदैव एक - दूसरे की ढाल बने रहे और अंततः साथ ही झूरी के घर लौटे।
In simple words: हीरा और मोती की पक्की दोस्ती उनके मिलकर हल खींचने, सांड का मिलकर सामना करने और काँजीहौस में मुसीबत के समय एक - दूसरे को अकेला न छोड़ने की घटनाओं से साफ़ दिखाई देती है।

Exam Tip: उत्तर को प्रभावशाली बनाने के लिए तीनों बिंदुओं (मूक सहानुभूति, साँड़ से युद्ध, और काँजीहौस का सह - त्याग) को अलग - अलग शीर्षकों में प्रस्तुत करें।

 

Question 7. “उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
Answer: झूरी की पत्नी (मालकिन) और गया के घर की छोटी बच्ची के व्यवहार में संवेदनशीलता के दो भिन्न स्तर दिखाई देते हैं:
- झूरी की पत्नी (मालकिन): प्रारंभ में उनका रवैया बैलों के प्रति अत्यधिक कठोर और उपेक्षापूर्ण था। वे बैलों के भागकर लौटने को स्वामिद्रोह मानकर उन्हें 'नमक - हराम' कहती हैं। यद्यपि कहानी के अंत में, बैलों की दुर्दशा और कसाई के चंगुल से बचकर आने के संघर्ष को देखकर उनका हृदय द्रावित हो जाता है और वे आत्मीयता से उनके मस्तक को चूम लेती हैं।
- गया के घर की छोटी लड़की: यह अबोध बालिका प्रारंभ से ही बैलों के प्रति अत्यंत करुणामय और संवेदनशील थी। स्वयं सौतेली माँ के दमन को झेलने के कारण वह बैलों की मूक पीड़ा को आत्मसात कर लेती थी। वह रात को उन्हें चुपके से रोटियाँ खिलाती थी और अंततः उनकी रस्सियाँ खोलकर उन्हें आज़ाद कर देती है। उसका यह करुणामय व्यवहार अटूट और निस्वार्थ था।
In simple words: झूरी की पत्नी शुरू में गुस्से में बैलों को नमक - हराम समझती थी, पर अंत में प्यार से उन्हें गले लगा लेती है। इसके विपरीत, गया के घर की छोटी लड़की शुरू से ही बैलों के दुःख को समझकर उन्हें प्यार से रोटियाँ खिलाती है और उनकी जान बचाती है।

Exam Tip: दोनों पात्रों के व्यवहार की तुलना करने के लिए 'प्रारंभिक उपेक्षा बनाम स्थायी करुणा' को मुख्य आधार बनाएं।

 

कठिन शब्द और उनके अर्थ

शब्दअर्थ
निरापदआपत्ति से रहित, सर्वथा सुरक्षित
सहिष्णुतासहनशीलता, क्षमाशील होने का भाव
विषादउदासी, अवसाद या मन उचट जाना
पराकाष्ठाअंतिम सीमा या चरम कोटि
कदाचित्कभी - कभार, शायद
पछाईंपश्चिमी नस्ल के पशु, पश्चिम दिशा से संबंधित
चौकसचौकन्ना, सावधान या बिल्कुल ठीक
विग्रहअलग करना, फैलाना या खंडित करना
विनोदपरिहास, मनोरंजन या क्रीड़ा
आत्मीयताअपनापन, घनिष्ठ मैत्री
नाँदमिट्टी या सीमेंट का बड़ा बर्तन जिसमें पशुओं को चारा दिया जाता है
पगहियापशुओं को बाँधने वाली रस्सी
गराँवगले में पहनाई जाने वाली फंदेदार रस्सी
कनखियोंतिरछी निगाह से देखना, आँख की कोर से इशारा करना
चरनीवह लंबा स्थान जहाँ मवेशियों को चारा परोसा जाता है
प्रतिवादविरोध या खंडन करने की क्रिया
ताकीदचेतावनी देना, बार - बार स्मरण कराना
टिटकारविशिष्ट आवाज़ जिससे पशुओं को आगे बढ़ाया जाता है
तेवरक्रोधभरी तिरछी दृष्टि, कोप प्रकट करना
काँजीहौसवह सरकारी बाड़ा जहाँ आवारा मवेशियों को बंद रखा जाता है
मल्ल युद्धबाहुयुद्ध या कुश्ती
व्याकुलघबराया हुआ, अत्यंत व्याकुल या भीत
रगेदनाखदेड़ना, पीछे भागकर भगाना
तजुरबाव्यावहारिक अनुभव
बेतहाशाअत्यंत तीव्र गति से, बिना सोचे - विचारे
उजड्डपनअशिष्टता या उदंडता भरा व्यवहार
नीलामबोली लगाकर सबसे ऊँचे दाम पर सामान बेचने की प्रक्रिया
अख्तियारअधिकार, वश या अपनी पसंद का निर्णय लेने की शक्ति

जीवन-परिचय

विवरणजानकारी
पूरा नाममुंशी प्रेमचंद
मूल नामधनपत राय
जन्मसन् 1880
जन्म-स्थानलमही, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
निधनसन् 1936
भाषाहिंदी एवं उर्दू
विधाकहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध

 

साहित्यिक परिचय

प्रेमचंद जी को हिंदी साहित्य जगत में 'उपन्यास सम्राट' के नाम से भी अलंकृत किया गया है। उनके साहित्यिक सफर की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • उन्होंने शुरू में शिक्षा विभाग के अंतर्गत सरकारी सेवा की, परंतु बाद में असहयोग आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए अपना पद छोड़ दिया और पूरी तरह से लेखन कार्य में जुट गए।
  • उनके द्वारा रचित सभी कहानियों का संग्रह 'मानसरोवर' नामक ग्रन्थ के आठ खंडों में मिलता है।
  • हंस, माधुरी और जागरण जैसी प्रसिद्ध पत्रिकाओं के संपादन कार्य की जिम्मेदारी भी उन्होंने सफलतापूर्वक संभाली।
  • उनकी कृतियों में मुख्य रूप से कृषक वर्ग, श्रमिक, शोषित, महिला वर्ग और स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न पहलुओं को गहराई से उकेरा गया है।
  • उनकी लेखन शैली काफी सहज, सजीव और मुहावरों से युक्त है, जिसमें जनसामान्य में प्रचलित शब्दों का बहुत ही सुंदर प्रयोग देखने को मिलता है।
  • उनके लिखे साहित्य में केवल इंसानी पात्रों को ही नहीं, बल्कि मूक पशुओं और पक्षियों को भी अत्यंत संवेदनशील और आत्मीय स्थान दिया गया है।

 

प्रमुख रचनाएँ

उपन्यास: सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, कायाकल्प, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान

प्रसिद्ध कहानियाँ: पूस की रात, ईदगाह, बड़े भाई साहब, नमक का दारोगा, कफन, दो बैलों की कथा

 

पाठ का सारांश - दो बैलों की कथा

मुख्य पात्र एवं उनकी विशेषताएँ

पात्रस्वभावमुख्य विशेषताएँ
हीराधैर्यवान, विवेकशीलनीतिपरायण, सहनशील, दूरदर्शी, सच्चा मित्र
मोतीसाहसी, आवेगशीलस्वाभिमानी, वफादार, संघर्षशील, भावुक
झूरीस्नेही किसानबैलों से गहरा प्रेम, भावुक हृदय
गयास्वार्थी, क्रूरबैलों के प्रति निर्दयी, अपमानजनक व्यवहार
भैरो की बालिकादयालु, संवेदनशीलअनाथ, बैलों की सच्ची हितैषी, निःस्वार्थ
झूरी की स्त्रीकठोर स्वभावआरंभ में बैलों के प्रति अप्रिय, अंत में स्नेहिल

 

पाठ का संक्षिप्त परिचय

प्रस्तुत कहानी झूरी नाम के एक कृषक के दो बैलों - हीरा और मोती - के चारों ओर बुनी गई है। पछाईं नस्ल के ये दोनों बैल अत्यंत आकर्षक, कर्मठ तथा एक-दूसरे के प्रति प्रगाढ़ स्नेह रखने वाले हैं। इस रचना में पशुओं को मुख्य पात्र बनाकर लेखक ने आजादी, निरंतर संघर्ष, आत्मसम्मान और निश्छल मित्रता के महत्व को दर्शाया है।

 

भाग 1 - झूरी के घर से गया के यहाँ

  • झूरी के दोनों बैलों, हीरा और मोती, के बीच लंबे समय तक साथ रहने के कारण गहरी दोस्ती हो चुकी थी।
  • बिना कुछ बोले वे अपनी मौन भाषा और नेत्रों के संकेतों से आपस के विचारों और भावनाओं का आदान-प्रदान कर लेते थे।
  • एक बार झूरी ने किसी कारणवश अपने साले गया के साथ दोनों बैलों को उसके ससुराल भेज दिया।
  • हीरा और मोती को ऐसा महसूस हुआ मानो उनके वास्तविक स्वामी ने उन्हें कहीं बेच दिया है। वहाँ उन्हें खाने के लिए केवल रूखा और सूखा भूसा मिला तथा उचित चारा भी नसीब नहीं हुआ।
  • रात्रि के समय दोनों ने चुपचाप आपस में मंत्रणा की और अपनी रस्सियों को तोड़कर वापस झूरी के घर की दिशा में भाग खड़े हुए।
  • सुबह उठकर जब झूरी ने अपने बैलों को थान पर खड़ा पाया, तो उसका मन प्रेम से भर गया और उसने भागकर दोनों को आलिंगन में ले लिया।
  • ग्रामीण बालकों ने हर्षित होकर तालियाँ बजाते हुए उनका अभिनंदन किया। उनमें से एक बालक का कहना था - “बैल नहीं हैं वे, उस जनम के आदमी हैं।”

 

भाग 2 - दूसरी बार गया के यहाँ

  • अगले ही दिन गया फिर से झूरी के यहाँ पहुँचा और दोनों बैलों को वापस ले गया। इस बार उसने सावधानी बरतते हुए उन्हें गाड़ी में खींचा और मजबूत रस्सियों से बांध दिया।
  • मोती ने कुछ मौकों पर गाड़ी को गड्ढे में धकेलने का प्रयास किया, लेकिन अधिक धैर्यवान होने के कारण हीरा ने उसे ऐसा करने से रोक लिया।

वहाँ जाने पर उन्हें पुनः प्रताड़ित किया गया और खाने को केवल रूखा-सूखा भूसा डाल दिया गया, जिसे देखकर दोनों ने नाँद की ओर आँख उठाकर भी नहीं देखा।

  • रात्रि के समय भैरो की एक छोटी बेटी, जो अनाथ थी, ने चोरी-छिपे आकर दोनों बैलों को दो रोटियाँ खिला दीं।
  • वह बच्ची स्वयं पारिवारिक कष्टों से गुजर रही थी। उसकी सगी माता का देहांत हो चुका था और सौतेली माँ उसे प्रताड़ित करती थी, इसी समान दुःख के कारण उसका बैलों के साथ गहरा लगाव हो गया था।
  • एक रात उस दयालु बालिका ने उनके गले की रस्सियाँ खोल दीं और अत्यंत सावधानी से उन्हें वहाँ से भाग जाने का संकेत दिया।
  • हीरा ने विचार व्यक्त किया - “चलें तो, लेकिन कल इस अनाथ पर आफत आएगी।” लेकिन जब बालिका ने शोर मचाया, तो गया घबराकर बाहर आया और दोनों बैल वहाँ से तुरंत भाग निकले।

 

भाग 3 - साँड़ से मुठभेड़

  • भागते हुए दोनों मित्र अपना मार्ग भूल गए। उन्हें अनजान रास्ते और नए-नए गाँव दिखने लगे तथा पुराने परिचित मार्ग का कुछ पता न रहा।
  • वे एक खेत की मेड़ पर खड़े होकर अगली योजना सोच ही रहे थे कि तभी अचानक एक बहुत बड़ा और खूँखार साँड़ उनकी तरफ तेजी से बढ़ा।
  • हीरा ने तुरंत रणनीति बनाई - “मैं आगे से रगेदता हूँ, तुम पीछे से रगेदो - दोहरी मार पड़ेगी।”
  • दोनों साथियों ने मिलकर सूझबूझ से साँड़ पर धावा बोल दिया। वह विशाल जीव अंततः चोटिल होकर वहाँ से भागा और कुछ दूरी पर निढाल होकर गिर गया।
  • इस शानदार सफलता के उत्साह में दोनों मित्र खुशी से झूमते हुए आगे बढ़ चले।
  • इसके उपरांत तीव्र भूख लगने पर वे पास के एक मटर के खेत में चरने लगे, जहाँ खेत के पहरेदारों ने उन्हें घेरकर बंदी बना लिया।
  • हीरा खेत की सूखी मेड़ पर होने के कारण बच निकला, परंतु मोती पानी से सींचे हुए गीले खेत में फँस गया। उसके खुर कीचड़ में धँसने की वजह से वह भाग न सका और पकड़ा गया।
  • अपने परम मित्र को विपत्ति में देख हीरा भी वापस लौट आया। उसने दृढ़ निश्चय किया - “फँसेंगे तो दोनों फँसेंगे।”
  • रखवालों ने हीरा को भी दबोच लिया और अगले दिन सुबह दोनों को गाँव के पशु बंदीगृह (काँजीहौस) में डाल दिया गया।

 

भाग 4 - काँजीहौस में

  • काँजीहौस के भीतर उनका पूरा दिन बीत गया पर उन्हें चारे का एक तिनका तक नहीं दिया गया। दिनभर में केवल एक बार उन्हें पीने के लिए जल उपलब्ध कराया गया।
  • वहाँ पूर्व से ही कई अन्य लाचार पशु जैसे भैंसें, बकरियाँ, घोड़े और गधे बंद थे, जो भूख-प्यास के कारण निर्जीव अवस्था में पड़े थे।
  • विकल होकर दोनों मित्रों ने काँजीहौस की नमकीन मिट्टी को चाटना आरंभ किया, परंतु इससे उनकी भूख भला कैसे शांत हो पाती?
  • रात के समय हीरा के भीतर आक्रोश जाग उठा। उसने अपने तीखे सींगों से कच्ची दीवार पर प्रहार किया, जिससे मिट्टी का एक बड़ा टुकड़ा उखड़ गया।
  • इस गतिविधि को देखकर वहाँ के पहरेदार ने हीरा पर बेरहमी से लाठियाँ बरसाईं और उसे एक मजबूत तथा मोटी रस्सी से जकड़ दिया।
  • मोती ने दुखी होकर कहा - “आखिर मार खाई, क्या मिला?”
  • हीरा ने उत्तर दिया - “जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ।”
  • मित्र के हौसले से मोती में भी नया जोश आ गया और दोनों ने मिलकर लगातार दो घंटे तक कड़ा परिश्रम करके बाड़े की कच्ची दीवार का एक बड़ा भाग ढहा दिया।
  • दीवार के टूटते ही वहाँ बंद घोड़े, बकरियाँ और भैंसें तुरंत भाग गईं, परंतु दोनों गधे भयवश वहीं खड़े होकर विचार करते रहे।
  • हीरा ने उन्हें जाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा - “तो क्या हरज है। अभी तो भागने का अवसर है।”
  • मोती ने हीरा की जकड़ी हुई रस्सी को काटने का भरसक प्रयत्न किया। जब वह असफल रहा, तो हीरा ने उससे कहा - “तुम जाओ, मुझे यहीं पड़ा रहने दो।”
  • मोती की आँखें भर आईं और उसने भावुक होकर कहा - “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे हैं। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?”
  • मोती ने वहाँ खड़े दोनों गधों को अपने सींगों से ढकेलकर बाड़े से बाहर खदेड़ दिया और फिर स्वयं अपने लाचार मित्र के समीप आकर लेट गया।
  • प्रातःकाल होते ही जब मुंशी और पहरेदार ने बाड़े की स्थिति देखी, तो मोती को पकड़कर उसकी अत्यधिक पिटाई की गई और उसे भी मजबूत रस्सी से जकड़ दिया गया।

 

भाग 5 - नीलामी और घर वापसी

  • दोनों साथी लगभग सात दिनों तक उस बाड़े में कैद रहे और उन्हें चारे का एक तिनका तक नसीब नहीं हुआ। अत्यधिक कमजोरी के कारण वे उठने-बैठने में भी असमर्थ हो गए थे और उनकी हड्डियाँ साफ दिखाई देने लगी थीं।
  • एक दिन वहाँ करीब पचास-साठ लोगों की भीड़ जुटी और दोनों को बाहर लाया गया। लोग उनके जर्जर शरीर को देखते और निराश होकर लौट जाते थे।
  • तभी अचानक वहाँ लाल आँखों और अत्यंत निर्दयी चेहरे वाला एक कसाई जैसा दढ़ियल व्यक्ति पहुँचा, जिसे देखकर दोनों मित्र अत्यधिक भयभीत हो गए।
  • हीरा ने बुझे मन से कहा - “गया के घर से नाहक भागे। अब जान न बचेगी।”
  • मोती का अंदेशा था - “यह आदमी छुरी चलाएगा।”
  • हीरा ने संबल देते हुए कहा - “तो क्या चिंता है? माँस, खाल, सींग, हड्डी सब किसी-न-किसी काम आ जाएँगी।”
  • अंततः खरीदे जाने के बाद दोनों बैल उस दढ़ियल व्यक्ति के साथ चल पड़े। डर के मारे उनका रोम-रोम काँप रहा था।
  • मार्ग में उन्हें हरे-भरे मैदानों में चरते हुए सुखी पशुओं का झुंड दिख रहा था जो आनंदित थे, परंतु उन सुखी जीवों को इन संकटग्रस्त बैलों की कोई परवाह नहीं थी।
  • तभी अचानक उन्हें अपना पुराना जाना-पहचाना मार्ग महसूस होने लगा - वही जाने-पहचाने खेत, बाग और गाँव दिखाई देने लगे। उनकी सारी शारीरिक थकावट और कमजोरी पलभर में मिट गई और उनके कदम तेजी से आगे बढ़ने लगे।
  • मोती ने प्रसन्नतापूर्वक कहा - “हमारा घर नजदीक आ गया।”
  • हीरा ने ईश्वर का धन्यवाद करते हुए कहा - “भगवान की दया है।”
  • “मैं तो अब घर भागता हूँ।”
  • “इसे मैं मार गिराता हूँ।”
  • दोनों मित्र अत्यधिक उत्साहित होकर सीधे अपने घर की ओर भागे, जबकि वह दढ़ियल कसाई भी उनके पीछे-पीछे दौड़ने लगा।
  • अपने घर के द्वार पर बैठा झूरी गुनगुनी धूप का आनंद ले रहा था। बैलों को आते देख उसने दौड़कर उन्हें गले से लगा लिया और दोनों मित्रों के नयनों से हर्ष के अश्रु प्रवाहित होने लगे।
  • दढ़ियल ने वहाँ पहुँचकर बैलों को बांधने का प्रयास किया, जिस पर झूरी ने कड़ा प्रतिवाद करते हुए कहा - “मेरे बैल हैं।”
  • मोती ने आक्रामक होकर अपने सींग चलाए, जिससे वह दढ़ियल पीछे हटने को विवश हुआ। मोती ने उसका पीछा किया और अंततः वह डरकर वहाँ से भाग खड़ा हुआ।
  • हीरा ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा - “मैं डर रहा था कि कहीं तुम गुस्से में आकर मार न बैठो।”
  • मोती ने प्रत्युत्तर दिया - “अगर वह मुझे पकड़ता, तो मैं बे-मारे न छोड़ता।”
  • “हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता।”
  • “इसीलिए कि हम इतने सीधे हैं।”
  • कुछ ही समय में उनकी नाँदों में स्वादिष्ट खली, चोकर, भूसा और दाना परोस दिया गया, जिसे दोनों मित्र बड़े चाव से खाने लगे।
  • इसी बीच झूरी की पत्नी भी वहाँ आई और उसने वात्सल्य भाव से दोनों बैलों के मस्तक को चूम लिया।

 

हीरा और मोती की तुलना

आधारहीरामोती
स्वभावशांत, धैर्यशीलउग्र, आवेगशील
निर्णयसोच-समझकर लेता हैजल्दबाजी में लेता है
आधारहीरामोती
संघर्ष शैलीनीति और विवेक सेसाहस और बल से
मित्रतामित्र को रोकता हैमित्र के लिए जान देने को तैयार
प्रतीकविवेक और धर्मसाहस और विद्रोह

 

पाठ का स्वतंत्रता आंदोलन से संबंध

यह कहानी मात्र पशुओं के जीवन पर आधारित नहीं है, बल्कि प्रेमचंद जी ने इसके जरिए परोक्ष रूप से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष को चित्रित किया है। हमारी पाठ्यपुस्तक में भी इसके स्पष्ट प्रमाण और संकेत दिखाई देते हैं।

कहानी का तत्वस्वतंत्रता आंदोलन से संबंध
हीरा और मोतीस्वतंत्रता के लिए संघर्षरत भारतीय जनता
झूरीभारत माता / अपनी माटी से प्रेम
गया का अत्याचारब्रिटिश शासन का दमन और शोषण
काँजीहौसदासता, कारागार, औपनिवेशिक बंधन
दीवार तोड़नाक्रांति, विद्रोह, असहयोग आंदोलन
घर वापसीस्वतंत्रता की प्राप्ति
बालिका की सहायतादेशभक्त नागरिकों का सहयोग

पाठ का मुख्य संदेश: आजादी आसानी से प्राप्त नहीं होती, इसके लिए निरंतर और बार-बार कड़ा संघर्ष करना आवश्यक होता है।

 

प्रमुख मुहावरे और उनका अर्थ एवं वाक्य-प्रयोग

मुहावराअर्थवाक्य-प्रयोग
दाँतों पसीना आनाबहुत कठिन काम पड़नाउस भारी चट्टान को हटाने में मजदूरों के दाँतों पसीना आ गया।
दिल में ऐंठकर रह जानामन की बात मन में ही दबा लेनाअपमान सहकर भी मोती दिल में ऐंठकर रह गया।
जी तोड़कर काम करनापूरी मेहनत और लगन से काम करनारमेश ने परीक्षा में जी तोड़कर मेहनत की।
गम खा जानादुख को मन में दबा लेनावह गम खाकर रह गया, किसी से कुछ न कहा।
नौ-दो-ग्यारह होनाभाग जानाचोर पुलिस को देखते ही नौ-दो-ग्यारह हो गया।
जान हथेली पर लेकर लपकनामृत्यु की परवाह न करते हुए आगे बढ़नासैनिक जान हथेली पर लेकर दुश्मन से लड़ते हैं।
मन फीका करनाउदास हो जानाउनकी बात सुनकर सबका मन फीका हो गया।
ईंट का जवाब पत्थर से देनाकड़ा जवाब देनाभारत ने दुश्मन को ईंट का जवाब पत्थर से दिया।
जल उठनाक्रोध से भर जानाअपमान की बात सुनकर वह जल उठी।
अंतर्ज्ञान से दिल काँपनाभय से मन में कंपन होनाउस दढ़ियल को देखकर बैलों का दिल काँप उठा।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 अंक वाले)

 

Question 1. हीरा और मोती की मित्रता की कौन-सी तीन विशेषताएँ कहानी में उभरकर आती हैं?
Answer: कहानी के आधार पर हीरा और मोती की प्रगाढ़ मित्रता की तीन प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. मौन भाषा में संवाद: दोनों मित्र बिना किसी बाहरी शब्द के, आपस के संकेतों तथा मूक भाषा के माध्यम से एक-दूसरे के मनोभावों को सहजता से समझ लेते थे.
2. परस्पर त्याग और सहयोग: जब भी उन्हें गाड़ी या हल में जोता जाता था, तो दोनों की यही कोशिश रहती थी कि गाड़ी का अधिक से अधिक भार उनकी अपनी गर्दन पर आए ताकि दूसरे साथी को कम कष्ट उठाना पड़े।
3. विपत्ति में अटूट साथ: जब मोती मटर के खेत में कीचड़ में फँस गया और पकड़ा गया, तो सुरक्षित होने के बावजूद हीरा उसे अकेला छोड़कर नहीं भागा और लौट आया। उनका संकल्प था कि मुसीबत का सामना दोनों मिलकर करेंगे।
In simple words: दोनों बैल बिना बोले एक-दूसरे के दिल की बात समझ जाते थे, काम करते समय भारी बोझ खुद उठाने की कोशिश करते थे और मुसीबत आने पर कभी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ते थे।

Exam Tip: उत्तर में 'मूक भाषा', 'भार सहन करने की होड़' और 'संकट में साथ' जैसे प्रमुख बिंदुओं को अलग-अलग लिखकर रेखांकित करें ताकि परीक्षक को सभी तीन विशेषताएँ स्पष्ट दिखें।

 

Question 2. झूरी की स्त्री और भैरो की बालिका के व्यवहार की तुलना कीजिए।
Answer: झूरी की पत्नी और भैरो की बेटी का चरित्र तथा उनका बैलों के प्रति दृष्टिकोण एक-दूसरे से बिल्कुल विपरीत है, जिसकी तुलना निम्नलिखित तालिका द्वारा की जा सकती है:

तुलना का आधारझूरी की स्त्रीभैरो की बालिका
सामान्य व्यवहारकठोर, रूखा और अप्रियमृदु, कोमल और स्नेहमय
बैलों के प्रति रुखउन्हें 'नमक-हराम' कहकर प्रताड़ित कियासहानुभूतिपूर्वक रात में चुपके से रोटियाँ खिलाईं
किया गया कार्यखाने के लिए केवल रूखा-सूखा भूसा देने का हुक्म दियाउनके गले की रस्सी (गराँव) खोलकर उन्हें स्वतंत्र कर दिया
अंतर्निहित भावनास्वार्थ भावना और झूठा अहंकारनिःस्वार्थ प्रेम और करुणा की भावना
चरित्र का प्रतीकसंकुचित और अनुदार विचारधारा का प्रतीकउच्च मानवीय संवेदनाओं और सहृदयता का प्रतीक


In simple words: झूरी की पत्नी बहुत गुस्से वाली और कठोर थी, जिसने बैलों को सजा के तौर पर सूखा भूसा दिया। इसके विपरीत, भैरो की बेटी बहुत दयालु थी, जिसने बैलों का दुःख समझकर उन्हें रोटियाँ दीं और आजाद कर दिया।

Exam Tip: तुलना वाले प्रश्नों में हमेशा एक स्पष्ट तालिका बनाकर उत्तर प्रस्तुत करें। इससे अंकों के कटने की संभावना न के बराबर हो जाती है।

 

Question 3. काँजीहौस के प्रसंग में हीरा के चरित्र की कौन-सी विशेषता उभरकर आती है?
Answer: काँजीहौस की घटना हीरा के चरित्र की अदम्य संघर्षशीलता, दृढ़ इच्छाशक्ति और अटूट हौसले को प्रदर्शित करती है। कई दिनों तक भोजन-पानी न मिलने पर भी वह परिस्थितियों के आगे नतमस्तक नहीं हुआ। उसने अपनी आजादी के लिए अपने पैने सींगों से दीवार पर कड़े प्रहार किए। रक्षक द्वारा लाठियों की मार खाने और भारी जंजीरों में बंधने के बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी और अपना संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया। उसका यह क्रांतिकारी और निर्भीक रवैया उसे एक महान नायक के रूप में स्थापित करता है।
In simple words: काँजीहौस में हीरा ने भूखा रहने और मार खाने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। उसने सींग मारकर दीवार तोड़ दी, जिससे साबित होता है कि वह बहुत बहादुर और कभी हार न मानने वाला बैल था।

Exam Tip: उत्तर में हीरा के 'अदम्य साहस', 'स्वतंत्रता की चाह' और 'दृढ़ मनोबल' जैसे विशेषणों का प्रयोग अवश्य करें।

 

Question 4. कहानी के आरंभ में गधे की चर्चा क्यों की गई है?
Answer: लेखक मुंशी प्रेमचंद ने इस कहानी की शुरुआत में गधे के माध्यम से समाज की संकीर्ण मानसिकता पर तीखा व्यंग्य किया है। गधा संसार का सबसे सीधा, धैर्यवान और अत्यंत परिश्रमी जीव है, जो हर परिस्थिति में शांत रहता है। इसके बावजूद समाज उसके सीधेपन को उसकी मूर्खता मान लेता है। इस रूपक के जरिए लेखक ने तत्कालीन पराधीन भारतीयों की दुर्दशा पर भी कटाक्ष किया है, जो अत्यधिक सीधे और सहनशील होने के कारण ब्रिटिश हुकूमत का दमन सहने को विवश थे। इसी पृष्ठभूमि का उपयोग करते हुए लेखक ने बैलों की तुलना गधे से की और कहानी को मुख्य विषय पर मोड़ दिया।
In simple words: लेखक ने गधे का उदाहरण देकर समझाया है कि समाज में सीधे और शांत रहने वाले लोगों को अक्सर मूर्ख समझ लिया जाता है। इसके जरिए उन्होंने उस समय गुलाम भारतीयों की लाचारी पर भी तंज कसा है।

Exam Tip: गधे के सीधेपन को 'मूर्खता' समझे जाने और इसके बहाने पराधीन भारतीयों की 'सहनशीलता' पर किए गए व्यंग्य को उत्तर का मुख्य केंद्र बिंदु बनाएँ।

 

Question 5. ‘दो बैलों की कथा’ में प्रेमचंद ने किन मानवीय मूल्यों को उजागर किया है? उदाहरण सहित लिखिए।
Answer: प्रेमचंद जी ने इस प्रसिद्ध कहानी के माध्यम से निम्नलिखित उदात्त मानवीय मूल्यों को बहुत ही सुंदर ढंग से रेखांकित किया है:
1. प्रगाढ़ और निश्छल मित्रता: हीरा और मोती की प्रगाढ़ मैत्री इस कहानी की मूल आत्मा है। जब हीरा काँजीहौस में बंधा हुआ था, तो मोती सुरक्षित होने के बावजूद उसे छोड़कर नहीं भागा और संकट में अपने मित्र का साथ निभाना स्वीकार किया।
2. आत्मसम्मान: गया के घर पर अत्यंत तिरस्कारपूर्ण और अपमानजनक व्यवहार मिलने पर दोनों बैलों ने गुलामी स्वीकार करने के बजाय वहाँ से विद्रोह कर भाग जाना ही उचित समझा, जो उनके स्वाभिमान को दर्शाता है।
3. आजादी के प्रति अटूट प्रेम: पराधीनता किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं होती। काँजीहौस की दीवार को सींगों से ढहाकर अन्य बेजुबान जानवरों को आजाद कराना उनकी स्वतंत्रता की इसी तीव्र लालसा का प्रतीक है।
4. शोषण और अत्याचार का विरोध: अन्याय को चुपचाप सहने के बजाय उसका डटकर मुकाबला करना चाहिए। हीरा का यह कथन कि वह बंधनों की परवाह किए बिना अपना प्रयास जारी रखेगा, निरंतर प्रतिरोध का अनूठा उदाहरण है।
5. संवेदनशीलता और निस्वार्थ स्नेह: भैरो की अनाथ बालिका द्वारा अपनी सौतेली माँ का अत्याचार सहते हुए भी भूखे बैलों को रोटियाँ खिलाना और उनके बंधन खोल करना, निश्छल करुणा और आत्मीयता को प्रदर्शित करता है।
In simple words: इस कहानी में दोस्ती, आत्मसम्मान, आजादी की चाह, अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना और दूसरों के प्रति दया रखने जैसे अच्छे मानवीय गुणों को बैलों और छोटी बच्ची के जरिए सिखाया गया है।

Exam Tip: दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में सभी मुख्य बिंदुओं को क्रमवार लिखकर प्रत्येक बिंदु के साथ कहानी से जुड़ा एक छोटा उदाहरण अवश्य दें।

 

Question 6. हीरा और मोती किस प्रकार एक-दूसरे के पूरक हैं? कहानी के आधार पर विस्तार से समझाइए।
Answer: हीरा और मोती का स्वभाव एक-दूसरे से काफी अलग होने के बावजूद वे एक संपूर्ण और आदर्श जोड़ी बनते हैं। उनकी यह विशेषता उन्हें एक-दूसरे का सच्चा पूरक बनाती है:
1. विपरीत स्वभाव का संतुलन: हीरा स्वभाव से अत्यंत धैर्यवान, शांत, नीतिपरायण और दूरदर्शी है, जबकि मोती उग्र, साहसी और अत्यंत आवेगशील है। मोती जहाँ किसी भी अन्याय का तुरंत बलपूर्वक जवाब देना चाहता है, वहीं हीरा सूझबूझ से काम लेता है। जैसे - जब मोती गया की गाड़ी को खाई में गिराना चाहता था, तब हीरा ने उसे शांत किया।
2. संयुक्त रणनीति का उपयोग: दोनों के गुणों का मेल उनकी शक्ति को दोगुना कर देता है। खतरनाक साँड़ के सामने आने पर हीरा ने रणनीति बनाई और मोती ने अपने साहस व शारीरिक बल से उस पर जोरदार प्रहार किया, जिसके फलस्वरूप वे विजयी हुए।
3. एक-दूसरे के पूरक की भूमिका: वे एक-दूसरे की कमियों को पाटते हैं। हीरा का संयम और मोती की आक्रामक शक्ति मिलकर एक ऐसी अजेय जोड़ी तैयार करते हैं जो किसी भी परिस्थिति से निपटने में सक्षम है। काँजीहौस में दीवार तोड़ने की पहल जहाँ हीरा ने सींग मारकर की, वहीं जंजीरों में बंधने के बाद मोती ने उस कार्य को पूर्णता दी।
अतः यह जोड़ी यह संदेश देती है कि जीवन में सफलता पाने के लिए बुद्धि और शौर्य, दोनों का समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
In simple words: हीरा बहुत समझदार और शांत दिमाग वाला था, जबकि मोती बहुत गुस्सैल और ताकतवर था। दोनों मिलकर एक-दूसरे की कमियों को पूरा करते थे और अपनी इसी एकता के कारण उन्होंने साँड़ को हराया और काँजीहौस से भागे।

Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में 'बुद्धि (विवेक) और साहस का समन्वय' मुख्य निष्कर्ष होना चाहिए, जिसे रेखांकित करना न भूलें।

 

Question 7. भैरो की बालिका की कहानी में क्या भूमिका है?
Answer: कहानी 'दो बैलों की कथा' में भैरो की छोटी बेटी का चरित्र अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वह सौतेली माँ के अत्याचार सहते हुए भी दोनों बैलों के प्रति असीम दयाभाव रखती है। वह न केवल उन्हें चुपके से रोटियाँ खिलाकर उनकी भूख शांत करती है, बल्कि एक रात उनके बंधन (गराँव) खोलकर उन्हें गया के घर की कैद से आजाद भी करा देती है। उसकी यह सहृदयता दर्शाती है कि दुःख सहने वाला ही दूसरों के दुःख को भली-भाँति समझ सकता है। बालिका का यह निस्वार्थ प्रेम बैलों के भीतर विपरीत परिस्थितियों में भी मानवीय संवेदनाओं के प्रति विश्वास बनाए रखता है।
In simple words: भैरो की बेटी खुद अपनी सौतेली माँ के सताए जाने से दुखी थी, इसलिए उसने बैलों का दुःख समझा। उसने बैलों को रोटियाँ दीं और रस्सियाँ खोलकर उन्हें आजाद कराया, जो कहानी का सबसे दयालु हिस्सा है।

Exam Tip: बालिका की भूमिका को 'दुःख की साझेदारी' और 'परोपकार' के दृष्टिकोण से स्पष्ट करें।

 

Question 8. कक्षा 9 की हिंदी पाठ्यपुस्तक गंगा पाठ 1 से परीक्षा में कौन-से प्रश्न सबसे अधिक पूछे जाते हैं?
Answer: कक्षा 9 की हिंदी परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाते हैं:
1. हीरा और मोती के चरित्र की तुलनात्मक विशेषताएँ लिखिए।
2. कहानी के प्रारंभ में मुंशी प्रेमचंद जी ने गधे के माध्यम से किस सामाजिक बुराई और भारतीयों की पराधीनता पर व्यंग्य किया है?
3. काँजीहौस में बंद जानवरों का जीवन कैसा था और हीरा-मोती ने उन्हें कैसे मुक्त कराया?
4. इस कहानी के माध्यम से लेखक ने स्वतंत्रता आंदोलन का क्या संदेश दिया है?
ये प्रश्न अक्सर परीक्षा में दीर्घ और लघु उत्तरीय प्रारूप में पूछे जाते हैं।
In simple words: परीक्षा में ज्यादातर हीरा-मोती के स्वभाव का अंतर, गधे को बेवकूफ समझे जाने का कारण और आजादी के आंदोलन से इस कहानी का संबंध पूछने वाले प्रश्न आते हैं।

Exam Tip: इन चारों महत्वपूर्ण विषयों के उत्तर पहले से तैयार रखें क्योंकि लगभग हर परीक्षा में इन्हीं में से कोई एक प्रश्न अवश्य पूछा जाता है।

 

Question 9. प्रेमचंद ने कहानी, कक्षा 9 हिंदी गंगा पाठ 1, की शुरुआत गधे से क्यों की?
Answer: मुंशी प्रेमचंद जी ने कहानी की शुरुआत गधे के वर्णन से इसलिए की ताकि वे समाज में 'सीधेपन' और 'सहनशीलता' को मूर्खता समझे जाने की गलत सोच पर गहरा प्रहार कर सकें। गधा अत्यंत शांत और संतोषी जीव है, पर उसे नासमझ माना जाता है। इस रूपक के माध्यम से लेखक ने तत्कालीन भारतवासियों पर भी व्यंग्य किया है, जो अंग्रेजों के अत्याचारों को चुपचाप सहते थे और दुनिया उन्हें कमजोर समझती थी। इस प्रकार गधे के उदाहरण से भूमिका बनाकर लेखक ने पाठकों को बैलों के स्वाभिमानी और विद्रोही स्वभाव की ओर मोड़ा।
In simple words: लेखक ने गधे से शुरुआत इसलिए की ताकि वे सीधे और शांत लोगों को मूर्ख समझे जाने की समाज की गलत सोच पर तंज कस सकें और गुलाम भारतीयों की सहनशीलता को बैलों के स्वाभिमान से जोड़ सकें।

Exam Tip: इस उत्तर में सीधेपन को 'बेवकूफी' का पर्याय माने जाने की विडंबना को मुख्य आधार बनाएँ।

 

Question 10. क्या कक्षा 9 हिंदी गंगा का पाठ 1 एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में है?
Answer: हाँ, मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित 'दो बैलों की कथा' एनसीईआरटी (NCERT) और कई राज्य शिक्षा बोर्डों (जैसे यूपी बोर्ड, बिहार बोर्ड, आदि) के कक्षा 9 हिंदी के पाठ्यक्रम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राथमिक पाठ है। यह कहानी विद्यार्थियों को न केवल उत्कृष्ट हिंदी गद्य शैली से परिचित कराती है, बल्कि उनमें स्वतंत्रता, मैत्री और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता जैसे नैतिक मूल्यों का भी विकास करती है।
In simple words: हाँ, यह पाठ कक्षा 9 हिंदी के एनसीईआरटी और अन्य राज्य बोर्डों के सिलेबस का एक बहुत जरूरी हिस्सा है।

Exam Tip: यह जानकारी सामान्य पाठ्यक्रम की समझ के लिए है, परीक्षा में इसके नैतिक मूल्यों और कहानी के मूल संदेश पर आधारित प्रश्न ही पूछे जाते हैं।

NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga Chapter 01 दो बैलों की कथा

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Detailed Explanations for Ganga Chapter 01 दो बैलों की कथा

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Benefits of using Hindi Class 9 Solved Papers

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FAQs

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Are the Hindi NCERT solutions for Class 9 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

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How do these Class 9 NCERT solutions help in scoring 90% plus marks?

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Yes, we provide bilingual support for Class 9 Hindi. You can access NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga Chapter 01 दो बैलों की कथा in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Hindi NCERT solutions for Class 9 as a PDF?

Yes, you can download the entire NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga Chapter 01 दो बैलों की कथा in printable PDF format for offline study on any device.