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Detailed Chapter 09 मैया मैं नहीं माखन खायो NCERT Solutions for Class 6 Hindi
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Class 6 Hindi Chapter 09 मैया मैं नहीं माखन खायो NCERT Solutions PDF
पेज 111 - मेरी समझ से
Question 1. मैं माखन कैसे खा सकता हूँ? इसके लिए श्रीकृष्ण ने क्या तर्क दिया?
(a) मुझे तुम पराया समझती हो।
(b) मेरी माता, तुम बहुत भोली हो।
(c) मुझे यह लाठी-कंबल नहीं चाहिए।
(d) मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?
Answer: (d) मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?
In simple words: बाल कृष्ण ने अपनी माता से कहा कि उनके हाथ बहुत छोटे हैं, इसलिए वे ऊँचाई पर लटके हुए छीके से माखन कभी नहीं उतार सकते।
Exam Tip: श्रीकृष्ण के इस भोलेपन और चतुराई भरे तर्क को समझने के लिए पद की पंक्ति 'मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो' को ध्यान में रखें।
Question 2. श्रीकृष्ण माँ के आने से पहले क्या कर रहे थे?
(a) गाय चरा रहे थे।
(b) माखन खा रहे थे।
(c) मधुबन में भटक रहे थे।
(d) मित्रों के संग खेल रहे थे।
Answer: (b) माखन खा रहे थे।
In simple words: यशोदा माता के घर पहुँचने से पहले बाल कृष्ण चुपके से घर में माखन खा रहे थे।
Exam Tip: माँ यशोदा ने जब कान्हा को पकड़ा तो उनके मुख पर चारों तरफ माखन लिपटा हुआ था, जिससे स्पष्ट होता है कि वे माखन खा रहे थे।
Question 3. अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें?
Answer: हमने इन उत्तरों का चयन इसलिए किया क्योंकि पहले प्रश्न का उत्तर सीधे कविता की पंक्तियों 'मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो' से मिलता है, जहाँ श्रीकृष्ण स्वयं को छोटा बालक बताकर छीके तक न पहुँच पाने का तर्क देते हैं। दूसरे प्रश्न का उत्तर इस घटना से स्पष्ट होता है कि यशोदा माता के आने पर बाल कृष्ण के मुख पर माखन लगा हुआ था, जिसे देखकर माता को उनकी चोरी का पता चला था।
In simple words: कविता में दिए गए कृष्ण के प्यारे तर्कों और उनके मुख पर लगे माखन की घटना से हमें इन प्रश्नों के सही उत्तर का पता चलता है।
Exam Tip: चर्चा वाले प्रश्नों का उत्तर देते समय हमेशा पद की मूल पंक्तियों का संदर्भ देना सबसे सही रहता है।
पेज 112 - मिलकर करें मिलान
Question 4. पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए -
| शब्द | अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| 1. जसोदा | 1. यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था। |
| 2. पहर | 2. समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर होता है)। (एक दिवस में आठ पहर होते हैं)। |
| 3. लकुटी कमरिया | 3. लाठी और छोटा कंबल, कमली (मान्यता है कि श्रीकृष्ण लकुटी-कमरिया लेकर गाय चराने जाया करते थे)। |
| 4. बंसीवट | 4. एक वट वृक्ष (मान्यता है कि श्रीकृष्ण जब गाय चराया करते थे, तब वे इसी वृक्ष के ऊपर चढ़कर वंशी की ध्वनि से गायों को पुकारकर उन्हें एकत्रित करते थे)। |
| 5. मधुबन | 5. मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन। |
| 6. छीको | 6. गोल पात्र के आकार का रस्सियों का बुना हुआ जाल जो छत या ऊँची जगह से लटकाया जाता है ताकि उसमें रखी हुई खाने-पीने की चीज़ों (जैसे- दूध, दही आदि) को कुत्ते, बिल्ली आदि न पा सकें। |
| 7. माता | 7. जन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ। |
| 8. ग्वाल-बाल | 8. गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी साथी। |
Answer:
सही मिलान इस प्रकार है:
1. जसोदा → यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था।
2. पहर → समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर होता है)। (एक दिवस में आठ पहर होते हैं)।
3. लकुटी कमरिया → लाठी और छोटा कंबल, कमली (मान्यता है कि श्रीकृष्ण लकुटी-कमरिया लेकर गाय चराने जाया करते थे)।
4. बंसीवट → एक वट वृक्ष (मान्यता है कि श्रीकृष्ण जब गाय चराया करते थे, तब वे इसी वृक्ष के ऊपर चढ़कर वंशी की ध्वनि से गायों को पुकारकर उन्हें एकत्रित करते थे)।
5. मधुबन → मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन।
6. छीको → गोल पात्र के आकार का रस्सियों का बुना हुआ जाल जो छत या ऊँची जगह से लटकाया जाता है ताकि उसमें रखी हुई खाने-पीने की चीज़ों (जैसे- दूध, दही आदि) को कुत्ते, बिल्ली आदि न पा सकें।
7. माता → जन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ।
8. ग्वाल-बाल → गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी साथी।
In simple words: इस मिलान में पाठ में आए ब्रजभाषा और ग्रामीण जीवन से जुड़े विभिन्न शब्दों को उनके अर्थ और धार्मिक महत्त्व के साथ जोड़ा गया है।
Exam Tip: 'लकुटी कमरिया' और 'छीको' जैसे ठेठ देहाती और सांस्कृतिक शब्दों के अर्थों को अच्छी तरह समझ लें, यह परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।
Question 5. कविता में से कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए -
(क) "भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो"
(ख) "सूरदास तब बिहसिं जसोदा, लै उर कंठ लगायो"
Answer:
(क) इस पंक्ति का अर्थ यह है कि बालक कृष्ण अपनी माँ से शिकायत करते हैं कि सुबह होते ही वे उन्हें गायों को चराने के लिए जंगल (मधुबन) में भेज देती हैं। वे कहना चाहते हैं कि उन्हें सुबह आराम करने का अवसर भी नहीं मिलता है।
(ख) इस पंक्ति का तात्पर्य है कि कृष्ण की ऐसी भोली और चतुराई से भरी दलीलों को सुनकर माता यशोदा का गुस्सा गायब हो जाता है। वे प्यार से मुस्कुरा उठती हैं और अपने नन्हे पुत्र को उठाकर गले और हृदय से लगा लेती हैं।
In simple words: कान्हा शिकायत करते हैं कि सुबह होते ही उन्हें जंगल भेज दिया जाता है। उनकी इस मीठी बात को सुनकर माँ यशोदा मुस्कुराकर उन्हें गले से लगा लेती हैं।
Exam Tip: इन पंक्तियों का अर्थ लिखते समय माँ-बेटे के सुंदर और निश्छल वात्सल्य प्रेम को मुख्य बिंदु के रूप में दर्शाएं।
पेज 113 - सोच-विचार के लिए
Question 6. पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर ढूँढकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए -
(क) पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या बताया है?
Answer:
इस पद में श्रीकृष्ण ने स्वयं को एक अत्यंत सीधा और नासमझ बालक बताया है। उन्होंने कहा कि उनकी बाँहें (हाथ) बहुत छोटी हैं जिससे वे ऊँचाई पर रखे छीके तक नहीं पहुँच सकते। उन्होंने यह भी बताया कि वे सुबह से शाम तक गायों के पीछे मधुबन के जंगलों में भटकते रहते हैं और थके-हारे शाम को घर लौटते हैं।
In simple words: कान्हा ने खुद को छोटा बच्चा बताया है जिसके हाथ छीके तक नहीं पहुँचते और जो सारा दिन जंगल में गाय चराता है।
Exam Tip: श्रीकृष्ण के आत्म-चित्रण को लिखते समय 'बालक' और 'छीको' के बीच के संबंध को ज़रूर स्पष्ट करें।
Question 7. यशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्यों लगा लिया?
Answer:
यशोदा माता भली-भांति जानती थीं कि कृष्ण ने ही माखन खाया है, लेकिन जब उन्होंने देखा कि बाल कृष्ण अपनी चोरी छिपाने के लिए कितनी मासूमियत और चतुराई से नए-नए तर्क गढ़ रहे हैं, तो वे उनके इस नटखट रूप पर मुग्ध हो गईं। कृष्ण के इसी बाल-सुलभ भोलेपन को देखकर वे अपनी हँसी नहीं रोक पाईं और उन्होंने प्यार से उन्हें गले लगा लिया।
In simple words: कृष्ण की प्यारी और झूठी कहानियों को सुनकर माँ यशोदा का गुस्सा प्यार में बदल गया और उन्होंने हँसते हुए कान्हा को गले लगा लिया।
Exam Tip: माता यशोदा के वात्सल्य भाव और कृष्ण के भोलेपन के प्रभाव को इस उत्तर में मुख्य रूप से दर्शाना चाहिए।
पेज 114 - कविता की रचना
Question 8. इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस पद की अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम भी दिया है आदि।
Answer:
सूरदास जी द्वारा रचित इस सुंदर पद की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
• मधुर ब्रजभाषा का प्रयोग: यह पद बहुत ही कोमल और काव्यात्मक ब्रजभाषा में लिखा गया है।
• वात्सल्य रस की प्रधानता: इसमें माँ और बेटे के असीम प्रेम और नटखट बाल-लीलाओं का सजीव चित्रण है।
• संवादात्मक शैली: पद की रचना बातचीत की शैली में हुई है, जिससे कृष्ण और यशोदा के बीच का वार्तालाप जीवंत हो उठता है।
• कवि का नामोल्लेख: पद की अंतिम पंक्ति 'सूरदास तब बिहँसि जसोदा' में कवि ने अपने नाम का उल्लेख किया है, जो प्राचीन काल की विशिष्ट काव्य शैली थी।
In simple words: यह पद बहुत ही मीठी भाषा में है। इसमें कान्हा और मैया की बातचीत को बहुत सुंदर ढंग से दिखाया गया है और आखिर में कवि सूरदास का नाम भी आता है।
Exam Tip: काव्यात्मक विशेषताओं को लिखते समय भाषा की सरलता और वात्सल्य रस का उल्लेख करना न भूलें।
Question 9. अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
Answer:
विद्यार्थी अपने-अपने समूह में तैयार की गई विशेषताओं की सूची को कक्षा के अन्य छात्रों और शिक्षक के सामने प्रस्तुत करके अपने विचारों को साझा कर सकते हैं।
In simple words: सभी बच्चे मिलकर अपनी बनाई हुई सूची को अपनी क्लास में सबके साथ शेयर कर सकते हैं।
Exam Tip: सामूहिक प्रस्तुतीकरण में प्रत्येक छात्र की भागीदारी सुनिश्चित करें।
पेज 116 - अनुमान या कल्पना से
Question 10. अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए -
(क) श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तर्क क्यों दे रहे होंगे?
(ख) जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया, तब क्या हुआ होगा?
Answer:
(क) श्रीकृष्ण भली-भांति जानते थे कि उन्होंने माखन खाया है और माता ने उन्हें पकड़ लिया है। वे माता के गुस्से और सजा से बचने के लिए बहुत ही मासूमियत से तरह-तरह के बहाने और तर्क दे रहे हैं ताकि वे स्वयं को निर्दोष साबित कर सकें और माता का गुस्सा शांत हो सके।
(ख) जब यशोदा माता ने कृष्ण को गले से लगा लिया होगा, तो कृष्ण का सारा डर तुरंत दूर हो गया होगा। वे मन ही मन बहुत खुश हुए होंगे कि उनका बहाना काम कर गया। मैया के गले लगते ही कान्हा का गुस्सा और शिकायतें भी प्यार में बदल गई होंगी।
In simple words: कान्हा मैया की डाँट से बचने के लिए झूठे तर्क दे रहे थे। जब मैया ने उन्हें गले लगाया तो कान्हा बहुत खुश हुए होंगे कि उनकी तरकीब काम कर गई।
Exam Tip: कल्पना आधारित प्रश्नों का उत्तर देते समय बच्चों के स्वाभाविक मनोविज्ञान को ध्यान में रखकर उत्तर लिखें।
पेज 117 - शब्दों के रूप
Question 11. 'भोर भयो गैयन के पाछे' इस पंक्ति में 'पाछे' शब्द आया है जिसका उपयोग 'पीछे' के अर्थ में किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए।
परे, छोटो, बिधि, भोरी, कछु, लै, नहि
Answer:
दिए गए ब्रजभाषा के शब्दों के मानक हिंदी रूप निम्नलिखित हैं:
• परे → पड़े / पीछे पड़ना
• छोटो → छोटा
• बिधि → तरीका / प्रकार / विधि
• भोरी → भोली
• कछु → कुछ
• लै → लेकर / लेना
• नहि → नहीं
In simple words: पुराने समय की कविता में कुछ शब्द थोड़े अलग तरीके से लिखे जाते थे, जैसे 'भोरी' को आज हम 'भोली' और 'छोटो' को 'छोटा' लिखते हैं।
Exam Tip: ब्रजभाषा के शब्दों को उनके खड़ी बोली (आधुनिक हिंदी) रूपों के साथ मिलान करने का अभ्यास नियमित करें।
पेज 118 - मिलान और वर्ण परिवर्तन
Question 12. पद में से कुछ शब्द चुनकर नीचे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और स्तंभ 2 में उनके अर्थ दिए गए हैं। शब्दों का उनके सही अर्थों से मिलान कीजिए -
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. उपजि | 1. मुसकाई, हँसी |
| 2. जनि | 2. उपजना, उत्पन्न होना |
| 3. जायो | 3. जानकर, समझकर |
| 4. जिय | 4. विश्वास किया, सच माना |
| 5. पठायो | 5. बाँह, हाथ, भुजा |
| 6. पतिायो | 6. प्रकार, भाँति, रीति |
| 7. बहियन | 7. मन, जी |
| 8. बिधि | 8. जन्मा |
| 9. बिहसिं | 9. इधर-उधर घुमा या भटका |
| 10. भटक्यो | 10. भेज दिया |
| 11. लपटायो | 11. लगाया, पोता |
Answer:
सही मिलान इस प्रकार है:
1. उपजि → उपजना, उत्पन्न होना
2. जनि → जानकर, समझकर
3. जायो → जन्मा
4. जिय → मन, जी
5. पठायो → भेज दिया
6. पतिायो → विश्वास किया, सच माना
7. बहियन → बाँह, हाथ, भुजा
8. बिधि → प्रकार, भाँति, रीति
9. बिहसिं → मुसकाई, हँसी
10. भटक्यो → इधर-उधर घुमा या भटका
11. लपटायो → लगाया, पोता
In simple words: इस मिलान के जरिए हम कविता में आए पुराने ब्रजभाषा के शब्दों के अर्थों को अपनी रोज़मर्रा की भाषा में समझ सकते हैं।
Exam Tip: 'पतिायो' का अर्थ विश्वास करना और 'बिहँसि' का अर्थ हँसना होता है, ये दोनों शब्द परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
Question 13. "साँझ परे घर आयो" - 'परे' का अर्थ है 'पड़े'। यहाँ 'ड़' और 'र' वर्ण परस्पर बदल गए हैं। ऐसे शब्द चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
Answer:
ब्रजभाषा में 'ड़' या 'ल' के स्थान पर 'र' का प्रयोग बहुत आम है। पाठ से ऐसे वर्ण परिवर्तन वाले कुछ प्रमुख शब्द और उनके मूल हिंदी रूप निम्नलिखित हैं:
• भोरी → भोली ('ल' के स्थान पर 'र')
• परे → पड़े ('ड़' के स्थान पर 'र')
• खायो → खाया ('यो' के स्थान पर 'या')
• पठायो → पठाया (भेजा)
• भटक्यो → भटका
• आयो → आया
• पायो → पाया
• लपटायो → लपटाया (लगाया)
In simple words: ब्रजभाषा में कई बार 'ल' की जगह 'र' बोला जाता है, जैसे 'भोली' को 'भोरी' लिखना या 'पड़े' को 'परे' लिखना।
Exam Tip: वर्ण परिवर्तन को समझते समय 'ड़ ↔ र' और 'ल ↔ र' के नियमों को ध्यान में रखें।
पेज 119 - भावार्थ का मिलान
Question 14. नीचे स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उनके भावार्थ दिए गए हैं। रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए -
| स्तंभ 1 (पंक्तियाँ) | स्तंभ 2 (भावार्थ) |
|---|---|
| 1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। | 1. मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ? |
| 2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो। | 2. तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया। |
| 3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो। | 3. माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गईं हो। |
| 4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो। | 4. सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया। |
| 5. तु माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो। | 5. चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया। |
| 6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो। | 6. ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने जबरदस्ती मेरे मुख पर लिपटा दिया। |
Answer:
सही मिलान इस प्रकार है:
1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। → सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया।
2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो। → चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया।
3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो। → मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ?
4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो। → ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने जबरदस्ती मेरे मुख पर लिपटा दिया।
5. तु माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो। → माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गईं हो।
6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो। → तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया।
In simple words: इस मिलान के द्वारा सूरदास जी के पद की हर एक कठिन पंक्ति का सरल और आसान हिंदी अनुवाद समझाया गया है।
Exam Tip: परीक्षा में श्लोक या पद की पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट करने के लिए इस मिलान के वाक्यों को अच्छी तरह याद कर लें।
पेज 120 - आपकी बात और घरेलू वस्तुएँ
Question 15. 'मैया मैं नहिं माखन खायो' यहाँ श्रीकृष्ण अपनी माँ के सामने सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया है। कभी-कभी हमें दूसरों के सामने सिद्ध करना पड़ता है कि यह कार्य हमने नहीं किया। क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है? कब? किसके सामने? आपने अपनी बात सिद्ध करने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए? उस घटना के बारे में बताइए।
Answer:
हाँ, ऐसी ही एक घटना मेरे साथ कक्षा पाँच में हुई थी। हमारी कक्षा की खिड़की का काँच टूट गया था और कक्षा के मॉनिटर को लगा कि यह शरारत मैंने की है क्योंकि मैं उस समय खिड़की के पास ही खेल रहा था। मैंने शिक्षक के सामने खुद को निर्दोष साबित करने के लिए तर्क दिया कि खिड़की का काँच अंदर की तरफ गिरा था, जिसका अर्थ है कि गेंद बाहर से आई थी। इसके अतिरिक्त, मैंने अपने सहपाठियों की गवाही भी दिलाई जो गवाह थे कि मैं उस समय अपनी कॉपी में लिख रहा था। मेरी दलीलें सुनकर शिक्षक मान गए कि काँच मैंने नहीं तोड़ा था।
In simple words: एक बार स्कूल में खिड़की का काँच टूटने का आरोप मुझ पर लगा था। मैंने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए सही तर्क दिए और साबित किया कि मैं उस समय अपनी पढ़ाई कर रहा था।
Exam Tip: ऐसे अनुभवों को लिखते समय अपनी बात को तार्किक और स्पष्ट रूप से लिखना चाहिए, जिससे आपकी सच्चाई सिद्ध हो सके।
Question 16. "मै बालक बहिंयन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।" 'छीका' घर की एक ऐसी वस्तु है जिसे सैकड़ों-वर्ष से भारत में उपयोग में लाया जा रहा है। नीचे कुछ और घरेलू वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। इन्हें आपके घर में क्या कहते हैं? चित्रों के नीचे लिखिए -
Answer:
चित्रों में दिखाई गई पारंपरिक घरेलू वस्तुओं के नाम इस प्रकार हैं:
1. हांडी: मिट्टी का मटका जिसमें दूध-दही रखा जाता था।
2. कोयले वाली प्रेस: लोहे की प्रेस जिसमें गर्म कोयला भरकर कपड़े प्रेस किए जाते थे।
3. चौकी: लकड़ी का छोटा पाटा जिस पर बैठकर भोजन किया जाता है।
4. सिलाई मशीन: कपड़े सिलने का हाथ या पैर से चलने वाला यंत्र।
5. चारपाई: रस्सियों से बुनी हुई खाट (खटिया)।
6. मर्तबान: अचार या मुरब्बा रखने का चीनी मिट्टी का बर्तन।
7. सूप: अनाज साफ करने का बाँस या सींक का बना हुआ सूपड़ा।
8. सिल-बट्टा: मसाला पीसने का पारंपरिक पत्थर का उपकरण।
9. चक्की: हाथ से चलाई जाने वाली पत्थर की आटा पीसने वाली चक्की।
10. हाथ पंखा: हवा करने का बाँस या कपड़े का बना पंखा।
11. मथानी: दही मथकर मक्खन निकालने का लकड़ी का मथना।
12. छलनी: आटा या तरल पदार्थ छानने की छन्नी।
13. टोकरी: फल-सब्जी रखने की बाँस की बनी डलिया।
14. इमामदस्ता: ओखली और मूसल जिसमें मसाले कूटे जाते हैं।
15. मटकी मथानी: दही मथने के लिए उपयोग किया जाने वाला मटका।
16. छींका: रस्सियों का बना हुआ जाल जो बिल्ली-कुत्तों से बचाने के लिए छत से लटकाया जाता था।
In simple words: हमारे घरों में पुराने समय से कई ऐसी पारंपरिक चीजें इस्तेमाल होती आ रही हैं जैसे सिल-बट्टा, चक्की, चारपाई और मथानी।
Exam Tip: इन पारंपरिक उपकरणों के नामों को उनकी सही वर्तनी (spelling) के साथ याद रखें, यह आपकी शब्दावली को मजबूत बनाता है।
पेज 123 - दूध से घी बनाने की प्रक्रिया
Question 17. आप जानते ही हैं कि श्रीकृष्ण को माखन बहुत पसंद था। दूध से दही, माखन बनाया जाता है और माखन से घी बनाया जाता है। नीचे दूध से घी बनाने की प्रक्रिया संबंधी कुछ चित्र दिए गए हैं। अपने परिवार के सदस्यों, शिक्षकों या इंटरनेट आदि की सहायता से दूध से घी बनाने की प्रक्रिया लिखिए।
Answer:
दूध से घी बनाने की पारंपरिक भारतीय विधि अत्यंत वैज्ञानिक है, जिसे हम निम्नलिखित चरणों में समझ सकते हैं:
1. दूध उबालना: सबसे पहले गाय या भैंस का ताज़ा और शुद्ध दूध लेकर उसे बर्तन में अच्छी तरह उबाला जाता है और फिर ठंडा होने के लिए रख दिया जाता है।
2. मलाई एकत्र करना: ठंडा होने पर दूध के ऊपर जमी मोटी मलाई को प्रतिदिन निकालकर एक अलग बर्तन में इकट्ठा किया जाता है और उसे फ्रिज में सुरक्षित रखा जाता है।
3. दही जमाना (जामन): जब पर्याप्त मात्रा में मलाई जमा हो जाए, तो उसमें थोड़ा सा दही (जामन) मिलाकर रातभर के लिए रख दिया जाता है जिससे वह दही के रूप में जम जाए।
4. मथना (मक्खन निकालना): जमे हुए दही को मथनी की सहायता से अच्छी तरह मथा जाता है। मथने के दौरान ठंडा पानी डालने से मक्खन (माखन) तैरकर ऊपर आ जाता है और छाछ नीचे रह जाती है।
5. माखन अलग करना: ऊपर तैर रहे मक्खन को हाथों से गोल लड्डू की तरह बनाकर छाछ से अलग कर लिया जाता है और साफ पानी से धोया जाता है।
6. घी पकाना (तपाना): इस मक्खन को एक गहरी कड़ाही में रखकर धीमी आँच पर पकाया जाता है। धीरे-धीरे मक्खन पिघलने लगता है और उसकी अशुद्धियाँ नीचे बैठने लगती हैं।
7. घी छानना और स्टोर करना: जब कड़ाही में ऊपर सुनहरा और पारदर्शी तरल दिखने लगे और नीचे का अवशेष हल्का भूरा हो जाए, तो गैस बंद कर दी जाती है। इस घी को ठंडा करके एक साफ कांच के मर्तबान में छानकर सुरक्षित रख लिया जाता है।
In simple words: पहले दूध को उबालकर मलाई जमाते हैं, फिर उसका दही जमाकर मथनी से मथते हैं जिससे मक्खन निकलता है। आखिर में उस मक्खन को कड़ाही में पिघलाकर छानने से शुद्ध घी बनता है।
Exam Tip: घी बनाने की इस आठ-चरणीय प्रक्रिया को क्रमवार लिखना सीखें। प्रत्येक चरण का अपना एक वैज्ञानिक महत्त्व है।
पेज 124 - समय का माप
Question 18. "चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो।" 'पहर' और 'साँझ' शब्दों का प्रयोग समय बताने के लिए किया गया है। समय बताने के लिए और कौन-कौन से शब्दों का प्रयोग किया जाता है? अपने समूह में मिलकर सूची बनाइए और कक्षा में साझा कीजिए।
Answer:
समय को मापने और व्यक्त करने के लिए हिंदी भाषा में पारंपरिक और आधुनिक दोनों प्रकार के शब्दों का प्रयोग किया जाता है, जिनकी सूची इस प्रकार है:
• सूक्ष्म इकाइयाँ (कम समय): क्षण, पल, सेकंड, मिनट, घड़ी।
• दैनिक इकाइयाँ (दिन का समय): घंटा, पहर, सुबह (भोर), दोपहर, साँझ (संध्या), रात (निशा)।
• दीर्घ इकाइयाँ (अधिक समय): दिन, सप्ताह, पक्ष (कृष्ण/शुक्ल पक्ष), मास (महीना), अयन, वर्ष (साल), दशक, शताब्दी, युग।
In simple words: समय बताने के लिए हम रोज़ कई तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते हैं जैसे पल, मिनट, घंटा, सुबह, शाम, महीना और साल।
Exam Tip: एक पहर का समय लगभग 3 घंटे का होता है और पूरे दिन-रात में कुल 8 पहर होते हैं, इसे ध्यान में रखें।
Question 19. श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने घंटे गाय चराते थे?
Answer:
श्रीकृष्ण ने अपनी माता से कहा कि वे 'चार पहर' तक बंसीवट में भटकते रहे। चूंकि एक पहर लगभग तीन घंटे का होता है, इसलिए चार पहर का अर्थ हुआ कि वे दिनभर में लगभग 12 घंटे (3 × 4 = 12) तक जंगल में गायें चराते थे।
In simple words: चार पहर का मतलब होता है लगभग १२ घंटे। कान्हा के अनुसार वे सुबह से शाम तक १२ घंटे गायें चराने में बिताते थे।
Exam Tip: गणितीय रूप से 1 पहर = 3 घंटे को ध्यान में रखकर इस प्रकार के प्रश्नों का हल निकालें।
पेज 125 - पहर की गणना और हम सब विशेष हैं
Question 20. मान लीजिए वे शाम को छह बजे गाय चराकर लौटे। वे सुबह कितने बजे गाय चराने के लिए घर से निकले होंगे?
Answer:
यदि बाल कृष्ण शाम को 6 बजे घर लौटे और उन्होंने 12 घंटे (चार पहर) तक गायें चराईं, तो वे निश्चित रूप से सुबह ठीक 6 बजे गाय चराने के लिए अपने घर से निकले होंगे।
In simple words: शाम के ६ बजे से १२ घंटे पीछे जाने पर सुबह के ६ बजते हैं, इसलिए कान्हा सुबह ६ बजे घर से निकले होंगे।
Exam Tip: समय की गणना करते समय पूर्वाहन (AM) और अपराह्न (PM) के बीच के 12 घंटे के अंतर को ध्यान में रखें।
Question 21. 'दोपहर' का अर्थ है 'दो पहर' का समय। जब दूसरे पहर की समाप्ति होती है और तीसरे पहर का प्रारंभ होता है। यह लगभग 12 बजे का समय होता है, जब सूर्य सिर पर आ जाता है। बताइए दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग सुबह होगा?
Answer:
दिन के पहले पहर का प्रारंभ सामान्यतः सूर्योदय के समय यानी सुबह लगभग 6 बजे से होता है, जो सुबह 9 बजे तक चलता है।
In simple words: दिन का पहला पहर सुबह ६ बजे सूरज निकलने के साथ ही शुरू होता है।
Exam Tip: प्रत्येक पहर 3 घंटे का होता है: पहला पहर (6 से 9 बजे), दूसरा पहर (9 से 12 बजे) जिसे दोपहर कहते हैं।
Question 22. महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे। उनकी विशेष क्षमता थी उनकी कल्पना शक्ति और कविता रचने की कुशलता। हम सभी में कुछ न कुछ ऐसा होता है जो हमें सबसे भिन्न और सबसे विशेष बनाता है। नीचे दिए गए व्यक्तियों की विशेष क्षमताएँ क्या हैं, विचार कीजिए और लिखिए -
• आपकी:
• आपके किसी परिजन की:
• आपके शिक्षक की:
• आपके मित्र की:
Answer:
विभिन्न व्यक्तियों की विशेष क्षमताएँ इस प्रकार हैं:
• मेरी विशेष क्षमता: मेरी चित्रकारी और सुंदर स्केच बनाने की कला बहुत अच्छी है। मैं किसी भी चित्र को देखकर उसे कागज पर सुंदर तरीके से उतार सकता हूँ।
• मेरे परिजन (माताजी) की विशेष क्षमता: मेरी माताजी के पास स्वादिष्ट भोजन पकाने और पूरे परिवार का काम बहुत ही अनुशासित व समयबद्ध तरीके से सँभालने का हुनर है।
• मेरे शिक्षक की विशेष क्षमता: हमारे शिक्षक किसी भी कठिन विषय को बहुत ही सरल, रोचक और कहानियों के माध्यम से समझाने में बेहद कुशल हैं।
• मेरे मित्र की विशेष क्षमता: मेरा मित्र संगीत और गिटार बजाने में बहुत प्रतिभाशाली है। वह कोई भी धुन सुनकर उसे गिटार पर तुरंत बजा सकता है।
In simple words: भगवान ने हर किसी को कोई न कोई खास हुनर दिया है, जैसे किसी को अच्छी चित्रकारी आती है, तो कोई स्वादिष्ट खाना बनाने या अच्छा गाने में माहिर होता है।
Exam Tip: अपनी व्यक्तिगत क्षमताओं और रुचियों को पहचानकर उन्हें सकारात्मक ढंग से अभिव्यक्त करना सीखें।
Question 23. एक विशेष क्षमता ऐसी भी है जो हम सबके पास होती है। वह क्षमता है सबकी सहायता करना, सबके भले के लिए सोचना। तो बताइए, इसका उपयोग करके आप इनकी सहायता कैसे करेंगे -
1. एक सहपाठी पढ़ना चाहता है और वह इसे पाठ समझ में नहीं आ रहा है।
2. एक सहपाठी को पढ़ना अच्छा लगता है और वह देख नहीं सकता।
3. एक सहपाठी को चलने में कठिनाई होती है।
4. एक सहपाठी जो बोल या सुन नहीं सकता।
Answer:
विशेष आवश्यकताओं वाले सहपाठियों की मदद करने के संवेदनशील तरीके निम्नलिखित हैं:
1. पाठ न समझ पाने वाले सहपाठी की सहायता: मैं खाली समय में उसके साथ बैठूंगा और पाठ के कठिन हिस्सों को आसान उदाहरणों और चित्रों के माध्यम से बहुत ही सरल भाषा में समझाकर उसकी मदद करूंगा।
2. देख न पाने वाले सहपाठी की सहायता: मैं उसके लिए पाठ्यपुस्तक के अध्यायों को स्पष्ट और ऊँची आवाज में पढ़कर सुनाऊंगा। मैं उसके लिए मुख्य विषयों की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी तैयार कर सकता हूँ ताकि वह घर पर सुन सके और ब्रेल लिपि की पुस्तकें दिलाने में मदद करूंगा।
3. चलने में कठिनाई महसूस करने वाले सहपाठी की सहायता: मैं स्कूल आते-जाते समय उसका बस्ता पकड़ने या उसकी व्हीलचेयर को आगे बढ़ाने में मदद करूंगा। लंच के समय उसे पानी की बोतल या टिफिन लाने में सहायता करूंगा ताकि उसे चलने की परेशानी न हो।
4. बोल या सुन न पाने वाले सहपाठी की सहायता: मैं उसके साथ संवाद करने के लिए इशारों और सांकेतिक भाषा (साइन लैंग्वेज) की बुनियादी बातें सीखूंगा। कक्षा में ब्लैकबोर्ड पर लिखे गए शिक्षक के निर्देशों को अपनी नोटबुक में साफ-साफ लिखकर उसे दिखाऊंगा ताकि वह पढ़ाई में पीछे न रहे।
In simple words: हम अपने दोस्तों की छोटी-छोटी मदद कर सकते हैं, जैसे आँखों से न देख पाने वाले दोस्त को पाठ पढ़कर सुनाना, या चलने में असमर्थ दोस्त की व्हीलचेयर धकेलना।
Exam Tip: समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के तहत विशेष बच्चों की भावनाओं का सम्मान करना और उनकी मदद करना हमारा नैतिक कर्तव्य है, इसे उत्तर में अवश्य दर्शाएं।
पेज 127 - आज की पहेली (दुग्ध उत्पाद)
Question 24. दूध से माखन ही नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ बनाया जाता है। नीचे दूध से बनने वाली कुछ वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। दी गई शब्द-पहेली में उनके नाम के पहले अक्षर दे दिए गए हैं। नाम पूरे कीजिए -
Answer:
दूध और दही से बनने वाली वस्तुओं की शब्द-पहेली के पूरे नाम निम्नलिखित हैं:
1. खोवा
2. दही
3. मक्खन
4. पनीर
5. घी
6. लस्सी
7. आइसक्रीम
8. छाछ
9. मिठाई
10. शरबत
11. खीर
In simple words: इस पहेली में हमने दूध से बनने वाली खाने की सभी स्वादिष्ट चीजों के नाम ढूँढकर पूरे किए हैं, जैसे पनीर, खीर, लस्सी और मक्खन।
Exam Tip: दुग्ध उत्पादों (Dairy Products) के शुद्ध हिंदी नामों को पहचानना और उनकी सही वर्तनी लिखना सीखें।
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